बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस अत्यन्त अप्रिय वाणीको सुनकर राजाका हृदय काँप उठा और उनके मुखकी कान्ति फीकी पड़ गयी। [उन्होंने कहा—] हे ब्राह्मण! मैंने चौथेपनमें चार पुत्र पाये हैं, आपने विचारकर बात नहीं कही॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 206 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।
चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।
स्रोत अभिलेख 1.208 · पुस्तक पृ. 206, 207
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।
English explanation
AI-generated draft: Hearing these deeply unwelcome words, King Dasharatha's heart trembled and his face lost its radiance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| राजा | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| अति | अत्यंत | extremely |
| अप्रिय | अप्रिय | unwelcome |
| बानी | वाणी; बात | words; speech |
| हृदय | हृदय | heart |
| कंप | काँप उठा | trembled |
| मुख | मुख की | of the face |
| दुति | कांति | radiance |
| कुमुलानी | मुरझा गई | faded |
2 चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।
English explanation
I obtained four sons in the fourth stage of life, in old age. O Brahmin, you have spoken without considering this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चौथेंपन | जीवन के चौथे चरण में; बुढ़ापे में | in the fourth stage of life; in old age |
| पायउँ | मैंने पाए | I obtained |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारी | चार | four |
| बिप्र | हे ब्राह्मण विश्वामित्र | O Brahmin, Vishvamitra |
| बचन | बात | words |
| नहिं | नहीं | not |
| कहेहु | आपने कही | you have spoken |
| बिचारी | विचार करके | after considering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.208
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 206
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 206, 207
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।