बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह सुनकर मुनीश्वर विश्वामित्रजीने प्रेमसहित वचन कहे—हे राम! तुम नीतिकी रक्षा कैसे न करोगे; हे तात! तुम धर्मकी मर्यादाका पालन करनेवाले और प्रेमके वशीभूत होकर सेवकोंको सुख देनेवाले हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 216 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।
धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।
स्रोत अभिलेख 1.218 · पुस्तक पृ. 215, 216
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।
English explanation
Hearing this, the chief of sages said affectionately, “Rama, why would you not observe proper conduct?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनीसु | मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र | Vishvamitra, foremost of sages |
| कह | बोले | said |
| बचन | वचन | words |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | affectionately |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| राम | हे राम | O Rama |
| तुम्ह | तुम | you |
| राखहु | पालन करते हो | observe |
| नीती | उचित आचरण की मर्यादा | proper conduct |
2 धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।
English explanation
Dear child, you guard the bounds of righteousness; moved by love, you bring happiness to your servants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरम | धर्म की | of righteousness |
| सेतु | मर्यादा | bounds |
| पालक | रक्षक | guardian |
| तुम्ह | तुम | you |
| ताता | हे प्रिय पुत्र | dear child |
| प्रेम | प्रेम के | by love |
| बिबस | वश में | moved or bound |
| सेवक | सेवकों को | to servants |
| सुखदाता | सुख देने वाले | giver of happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.218
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 216
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 215, 216
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।