बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।
मूल पाठ
सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।
प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 1.291 · पुस्तक पृ. 276, 277
भावार्थ
मूल पाठ के बादचि_ी सुनकर दोनों भाई पुलकित हो गये। स्नेह इतना अधिक हो गया कि वह शरीरमें समाता नहीं। भरतजीका पवित्र प्रेम देखकर सारी सभाने विशेष सुख पाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 276 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।
English explanation
Hearing the letter, both brothers, Bharata and Shatrughna, thrilled with joy; their immense love could scarcely be contained in their bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पाती | पत्र | the letter |
| पुलके | रोमांचित हो उठे | thrilled with joy |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई—भरत और शत्रुघ्न | brothers—Bharata and Shatrughna |
| अधिक | अत्यधिक | immense |
| सनेहु | प्रेम | love |
| समात | समाता था | could be contained |
| न | नहीं | not |
| गाता | शरीर में | in the body |
2 प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।
English explanation
Seeing Bharata’s pure love, the entire assembly experienced exceptional joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| कै | का | of |
| देखी | देखकर | on seeing |
| सकल | समस्त | entire |
| सभाँ | सभा ने | the assembly |
| सुखु | सुख | joy |
| लहेउ | पाया | experienced |
| बिसेषी | विशेष | exceptional |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 276
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 276, 277
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।