बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।
मूल पाठ
तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।
भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।
स्रोत अभिलेख 1.291 · पुस्तक पृ. 276, 277
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब राजा दूतोंको पास बैठाकर मनको हरनेवाले मीठे वचन बोले—भैया! कहो, दोनों बच्चे कुशलसे तो हैं? तुमने अपनी आँखोंसे उन्हें अच्छी तरह देखा है न?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 276 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।
English explanation
Then King Dasharatha seated the messengers near him and spoke sweet, pleasing words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नृप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| दूत | दूतों को | the messengers |
| निकट | पास | near him |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| मधुर | मीठे | sweet |
| मनोहर | मन को भाने वाले | pleasing |
| बचन | वचन | words |
| उचारे | कहे | spoke |
2 भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।
English explanation
Brothers, tell me of the two boys’ welfare. Have you seen them clearly with your own eyes?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भैया | भाइयो | brothers |
| कहहु | बताओ | tell me |
| कुसल | कुशल-क्षेम | welfare |
| दोउ | दोनों | both |
| बारे | बालकों की—राम और लक्ष्मण की | of the boys—Rama and Lakshmana |
| तुम्ह | तुमने | you |
| नीकें | भली-भाँति | clearly and carefully |
| निज | अपनी | your own |
| नयन | आँखों से | with eyes |
| निहारे | देखा है | have seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 276
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 276, 277
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।