बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसाँवले और गोरे शरीरवाले वे धनुष और तरकस धारण किये रहते हैं, किशोर अवस्था है, विश्वामित्र मुनिके साथ हैं। तुम उनको पहचानते हो तो उनका स्वभाव बताओ। राजा प्रेमके विशेष वश होनेसे बार-बार इस प्रकार कह (पूछ) रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 276 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।
पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.291 · पुस्तक पृ. 276, 277
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।
English explanation
One is dark-complexioned and the other fair; they carry bows and quivers, are adolescent in age, and are with the sage Vishvamitra of the Kushika lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्यामल | साँवले—राम | dark-complexioned—Rama |
| गौर | गोरे—लक्ष्मण | fair-complexioned—Lakshmana |
| धरें | धारण किए हुए हैं | are carrying |
| धनु | धनुष | bows |
| भाथा | तरकश | quivers |
| बय | आयु में | in age |
| किसोर | किशोर | adolescent |
| कौसिक | कुशिक वंश के विश्वामित्र | Vishvamitra of the Kushika lineage |
| मुनि | मुनि | sage |
| साथा | के साथ | with |
2 पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।
English explanation
Do you recognize them? Tell me about their nature. Overcome with love, the king asks again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पहिचानहु | पहचानते हो | recognize |
| तुम्ह | तुम | you |
| कहहु | बताओ | tell me |
| सुभाऊ | उनका स्वभाव | their nature |
| प्रेम | प्रेम से | by love |
| बिबस | विवश | overcome |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| कह | कहते हैं | says |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 276
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 276, 277
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।