बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।
मूल पाठ
सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।
जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.125 · पुस्तक पृ. 136, 137
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रके मनमें यह डर हुआ कि देवॢष नारद मेरी पुरी (अमरावती) का निवास(राज्य) चाहते हैं। जगत्में जो कामी और लोभी होते हैं, वे कुटिल कौएकी तरह सबसे डरते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 137 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।
English explanation
Indra had this fear in his mind: ‘The divine sage Narada wants to dwell in my city.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनासीर | इंद्र | Indra |
| मन | मन | mind |
| महुँ | में | in |
| असि | ऐसा | such |
| त्रासा | भय | fear |
| चहत | चाहते हैं | desires |
| देवरिषि | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| मम | मेरे | my |
| पुर | नगर में | in the city |
| बासा | निवास | residence |
2 जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।
English explanation
Those in the world who are driven by desire and greed fear everyone, like a crafty crow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| कामी | कामनाओं के वशीभूत | driven by desire |
| लोलुप | लोभी | greedy |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| कुटिल | कुटिल | crafty |
| काक | कौए | a crow |
| इव | की तरह | like |
| सबहि | सबसे | everyone |
| डेराहीं | डरते हैं | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 137
- सहायक विषय
- अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 136, 137
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