बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।
मूल पाठ
सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।
करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.246 · पुस्तक पृ. 239, 240
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमीप आये हुए (भगवद्दर्शनरूप) अमृतके समुद्रको छोड़कर तुम [जगज्जननी जानकीको पत्नीरूपमें पानेकी दुराशारूप मिथ्या] मृगजलको देखकर दौड़कर क्यों मरते हो? फिर [भाई!] जिसको जो अच्छा लगे वही जाकर करो। हमने तो [श्रीरामचन्द्रजीके दर्शन करके ] आज जन्म लेनेका फल पा लिया (जीवन और जन्मको सफल कर लिया)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 239 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।
English explanation
Why leave the nearby ocean of nectar and run toward a mirage, only to perish?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुधा | अमृत का | of nectar |
| समुद्र | सागर | ocean |
| समीप | पास स्थित | nearby |
| बिहाई | छोड़कर | abandoning |
| मृगजलु | मृगतृष्णा का जल | mirage water |
| निरखि | देखकर | seeing |
| मरहु | मरते हो; अपने को नष्ट करते हो | perish; ruin yourselves |
| कत | क्यों | why |
| धाई | दौड़कर | running; rushing |
2 करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।
English explanation
Go and do whatever each of you pleases; as for us, today we have attained the fulfillment of our birth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहु | करो | do |
| जाइ | जाकर | having gone; go and |
| जा | जिसे; जिस व्यक्ति को | whoever; to whom |
| कहुँ | को | to |
| जोई | जो भी | whatever |
| भावा | अच्छा लगा; रुचा | pleases; appealed to |
| हम | हमने | we |
| तौ | तो; निश्चय ही | for our part; indeed |
| आजु | आज | today |
| जनम | जन्म का | of birth; of life |
| फलु | फल; सार्थकता | fruit; fulfillment |
| पावा | पा लिया | have attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 239
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 239, 240
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।