बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।
मूल पाठ
जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।
सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।
स्रोत अभिलेख 1.246 · पुस्तक पृ. 239, 240
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर श्रीरघुनाथजीको जगत्का पिता (परमेश्वर) विचारकर, नेत्र भरकर उनकी छबि देख लो [ऐसा अवसर बार-बार नहीं मिलेगा]। सुन्दर, सुख देनेवाले और समस्त गुणोंकी राशि ये दोनों भाई शिवजीके हृदयमें बसनेवाले हैं (स्वयं शिवजी भी जिन्हें सदा हृदयमें छिपाये रखते हैं, वे तुम्हारे नेत्रोंके सामने आ गये हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 239 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।
English explanation
Recognizing Rama as the Father of the world, gaze your fill upon his beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगत | जगत का | of the world |
| पिता | पिता | father |
| रघुपतिहि | रघुकुल के स्वामी श्रीराम को | Rama, lord of the Raghu lineage |
| बिचारी | मानकर; विचारकर | regarding as; considering |
| भरि | भरकर; भरपूर | to the full |
| लोचन | आँखें | eyes |
| छबि | सुंदर छवि | beauty; lovely appearance |
| लेहु | ले लो | do; take the opportunity |
| निहारी | निहारकर; देखकर | gazing upon; beholding |
2 सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।
English explanation
These two brothers are beautiful, bring joy, embody every virtue, and dwell in Shiva’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सुखद | सुख देने वाले | joy-giving |
| सकल | समस्त | all |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| रासी | भंडार; राशि | treasure; abundance |
| ए | ये | these |
| दोउ | दोनों | both; two |
| बंधु | भाई; राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| संभु | शिव के | of Shiva |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बासी | बसने वाले | dwelling; residing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 239
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 239, 240
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