बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।
मूल पाठ
ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।
सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।
स्रोत अभिलेख 1.246 · पुस्तक पृ. 239, 240
भावार्थ
मूल पाठ के बादगाल बजाकर व्यर्थ ही मत मरो। मनके लड्डुओंसे भी कहीं भूख बुझती है? हमारी परम पवित्र (निष्कपट) सीखको सुनकर सीताजीको अपने जीमें साक्षात् जगज्जननी समझो (उन्हें पत्नीरूपमें पानेकी आशा एवं लालसा छोड़ दो),॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 239 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।
English explanation
Do not wear yourselves out with pointless boasting. Can imagined sweets satisfy hunger?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यर्थ | व्यर्थ; निष्फल | pointlessly; in vain |
| मरहु | अपने को खपाओ; मरते रहो | wear yourselves out; perish |
| जनि | मत | do not |
| गाल | गाल | cheeks |
| बजाई | बजाकर; डींगें हाँककर | puffing out; boasting |
| मन | मन में कल्पित | imagined in the mind |
| मोदकन्हि | लड्डुओं से | with sweet dumplings |
| कि | क्या | can; does |
| भूख | भूख | hunger |
| बुताई | बुझती है; शांत होती है | is satisfied; is quenched |
2 सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।
English explanation
Hear our most sacred counsel: recognize Sita in your heart as the Mother of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिख | सीख; उपदेश | counsel; instruction |
| हमारि | हमारी | our |
| सुनि | सुनो; सुनकर | hear; having heard |
| परम | अत्यंत | supremely; most |
| पुनीता | पवित्र | sacred; pure |
| जगदंबा | जगत की माता | Mother of the world |
| जानहु | जानो; मानो | recognize; regard as |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| सीता | सीता; जनक की पुत्री | Sita, Janaka’s daughter |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 239
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 239, 240
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।