बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।
मूल पाठ
सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।
नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 180, 181
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुख, सम्पत्ति, पुत्र, सेना, सहायक, जय, प्रताप, बल, बुद्धि और बड़ाई—ये सब उसके नित्य नये [वैसे ही] बढ़ते जाते थे, जैसे प्रत्येक लाभपर लोभ बढ़ता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 180 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।
English explanation
AI draft: Happiness, wealth, sons, armies, allies, victory, might, strength, intelligence, and renown—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | happiness |
| संपति | संपत्ति | wealth |
| सुत | पुत्र | sons |
| सेन | सेना | army |
| सहाई | सहायक और सहयोगी | helpers and allies |
| जय | विजय | victory |
| प्रताप | प्रभावशाली पराक्रम | commanding might |
| बल | शक्ति | strength |
| बुद्धि | बुद्धि | intelligence |
| बड़ाई | प्रतिष्ठा और गौरव | prestige and renown |
2 नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।
English explanation
All these kept increasing afresh each day, just as greed grows with every gain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नूतन | नए-नए रूप में | afresh |
| सब | ये सभी | all these |
| बाढ़त | बढ़ते हुए | increasing |
| जाई | जाते हैं | keep on |
| जिमि | जैसे | just as |
| प्रतिलाभ | प्रत्येक लाभ के साथ | with every gain |
| लोभ | लालच | greed |
| अधिकाई | बढ़ता है | increases |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 180
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 180, 181
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।