बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।
मूल पाठ
सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।
सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।
स्रोत अभिलेख 1.23 · पुस्तक पृ. 225, 226
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह (सीताजीकी शोभा) सुन्दरताको भी सुन्दर करनेवाली है [वह ऐसी मालूम होती है] मानो सुन्दरतारूपी घरमें दीपककी लौ जल रही हो। (अबतक सुन्दरतारूपी भवनमें अँधेरा था, वह भवन मानो सीताजीकी सुन्दरतारूपी दीपशिखाको पाकर जगमगा उठा है, पहलेसे भी अधिक सुन्दर हो गया है)। सारी उपमाओंको तो कवियोंने जूँठा कर रखा है। मैं जनकनन्दिनी श्रीसीताजीकी किससे उपमा दूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 226 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।
English explanation
Sita’s beauty makes beauty itself beautiful; it is as though a lamp flame burns in the house of loveliness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदरता | सुंदरता | beauty itself |
| कहुँ | को | object marker |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| करई | बनाती है | makes |
| छबिगृहँ | सौंदर्य के भवन में | in the house of loveliness |
| दीपसिखा | दीपक की लौ | lamp flame |
| जनु | मानो | as though |
| बरई | जलती है | burns |
2 सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।
English explanation
Poets have already used up and made stale every comparison; with what can I compare Sita, the princess of Videha?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| उपमा | उपमाएँ | comparisons |
| कबि | कवियों ने | poets |
| रहे | पहले ही कर चुके हैं | have already |
| जुठारी | इस्तेमाल करके जूठी कर दीं | made stale through prior use |
| केहिं | किससे | with what |
| पटतरौं | मैं तुलना करूँ | shall I compare |
| बिदेहकुमारी | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 226
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 225, 226
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।