बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।
मूल पाठ
सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.105 · पुस्तक पृ. 119, 120
भावार्थ
मूल पाठ के बादसरस्वतीजी कठपुतलीके समान हैं और अन्तर्यामी स्वामी श्रीरामचन्द्रजी [सूत पकड़कर कठपुतलीको नचानेवाले] सूत्रधार हैं। अपना भक्त जानकर जिस कविपर वे कृपा करते हैं, उसके हृदयरूपी आँगनमें सरस्वतीको वे नचाया करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 119 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।
English explanation
O master, Saraswati is like a wooden puppet, and Rama, the knower of all hearts, is the puppeteer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| दारुनारि | लकड़ी की पुतली | a wooden puppet |
| सम | के समान | like |
| स्वामी | हे स्वामी | O master |
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| सूत्रधर | डोर चलाने वाले; कठपुतली के संचालक | the puppeteer; controller of the strings |
| अंतरजामी | सबके अंतःकरण को जानने वाले | knower of all hearts |
2 जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।
English explanation
When Rama graciously regards someone as his servant, he makes speech dance in that poet’s heart-courtyard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस पर | on whom |
| पर | पर | upon |
| कृपा | कृपा | grace |
| करहिं | करते हैं | bestows |
| जनु | अपना सेवक | his servant |
| जानी | जानकर; मानकर | recognizing as |
| कबि | कवि के | the poet’s |
| उर | हृदय के | heart’s |
| अजिर | आँगन में | in the courtyard |
| नचावहिं | नचाते हैं | makes dance |
| बानी | वाणी को | speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 119
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 119, 120
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