बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे मुनीश्वर! रामचरित्र अत्यन्त अपार है। सौ करोड़ शेषजी भी उसे नहीं कह सकते। तथापि जैसा मैंने सुना है, वैसा वाणीके स्वामी (प्रेरक) और हाथमें धनुष लिये हुए प्रभु श्रीरामचन्द्रजीका स्मरण करके कहता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 119 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।
तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।
स्रोत अभिलेख 1.105 · पुस्तक पृ. 119, 120
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।
English explanation
O eminent sage, Rama’s deeds are utterly boundless; even a billion serpent kings like Shesha cannot recount them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| चरित | चरित; जीवन और कर्म | life and deeds |
| अति | अत्यंत | utterly |
| अमित | अपरिमित | boundless |
| मुनिसा | हे मुनिश्रेष्ठ | O eminent sage |
| कहि | वर्णन कर | recount |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| अहीसा | सर्पराज शेष जैसे | serpent kings like Shesha |
2 तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।
English explanation
Nevertheless, remembering the bow-bearing Lord, master of speech, I shall recount it in detail as I have heard it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| जथाश्रुत | जैसा सुना है वैसा | as heard |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I shall recount |
| बखानी | विस्तार से वर्णन करके | expounding in detail |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| गिरापति | वाणी के स्वामी | master of speech |
| प्रभु | प्रभु | the Lord |
| धनुपानी | हाथ में धनुष धारण करने वाले राम | Rama, who holds a bow in his hand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 119
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 119, 120
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।