बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।
मूल पाठ
मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।
सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.105 · पुस्तक पृ. 119, 120
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने तुम्हारा गुण और शील जान लिया। अब मैं श्रीरघुनाथजीकी लीला कहता हूँ, सुनो। हे मुनि! सुनो, आज तुम्हारे मिलनेसे मेरे मनमें जो आनन्द हुआ है, वह कहा नहीं जा सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 119 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।
English explanation
I have understood your virtues and character. Now I shall recount Lord Rama’s deeds; listen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने | I |
| जाना | जान लिया | have understood |
| तुम्हार | तुम्हारे | your |
| गुन | गुण | virtues |
| सीला | शील; अच्छा स्वभाव | character; good disposition |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I shall recount |
| सुनहु | तुम सुनो | listen |
| अब | अब | now |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| लीला | लीला; चरित | deeds; divine play |
2 सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।
English explanation
Listen, sage! The joy my heart feels at meeting you today cannot be expressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| आजु | आज | today |
| समागम | मिलन से | from meeting |
| तोरें | तुम्हारे साथ | with you |
| कहि | कहा | expressed |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| जस | जैसा; जितना | such; the extent of |
| सुखु | सुख | joy |
| मन | मन में | in the heart |
| मोरें | मेरे | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 119
- सहायक विषय
- शिवजीका विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 119, 120
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।