बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।
मूल पाठ
साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।
सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।
स्रोत अभिलेख 1.315 · पुस्तक पृ. 295, 296
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके साथ [परम हर्षयुक्त] साधुओं और ब्राह्मणोंकी मण्डली ऐसी शोभा दे रही है, मानो समस्त सुख शरीर धारण करके उनकी सेवा कर रहे हों। चारों सुन्दर पुत्र साथमें ऐसे सुशोभित हैं, मानो सम्पूर्ण मोक्ष (सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य) शरीर धारण किये हुए हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 296 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।
English explanation
A company of holy men and Brahmins accompanied him, as though joys had taken bodily form to serve him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधु | सज्जन और संत | holy and virtuous men |
| समाज | समुदाय | company |
| संग | साथ | along with him |
| महिदेवा | ब्राह्मण; पृथ्वी के देव | Brahmins, called gods on earth |
| जनु | मानो | as though |
| तनु | शरीर | bodily form |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| करहिं | करते हों | were performing |
| सुख | सुख; आनंद के मूर्त रूप | joys personified |
| सेवा | सेवा | service |
2 सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।
English explanation
His four handsome sons shone beside him, as though all forms of liberation had assumed bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोहत | सुशोभित थे | shone beautifully |
| साथ | साथ में | beside him |
| सुभग | सुंदर | handsome |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारी | चार | four |
| जनु | मानो | as though |
| अपबरग | मोक्ष; मुक्ति के रूप | liberation; its forms |
| सकल | सभी | all |
| तनुधारी | शरीर धारण किए हुए | embodied |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.315
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 296
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 296
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