बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।
मूल पाठ
मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।
पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।
स्रोत अभिलेख 1.315 · पुस्तक पृ. 295, 296
भावार्थ
मूल पाठ के बादमरकतमणि और सुवर्णके रंगकी सुन्दर जोडिय़ोंको देखकर देवताओंको कम प्रीति नहीं हुई (अर्थात् बहुत ही प्रीति हुई)। फिर श्रीरामचन्द्रजीको देखकर वे हृदयमें (अत्यन्त) हॢषत हुए और राजाकी सराहना करके उन्होंने फूल बरसाये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 296 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।
English explanation
Seeing the beautiful pairs with emerald-like and golden complexions, the gods felt immense affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरकत | पन्ना; पन्ने जैसा रंग | emerald; emerald-like hue |
| कनक | सोना; सुनहरा रंग | gold; golden hue |
| बरन | वर्ण; शरीर का रंग | complexion |
| बर | सुंदर; श्रेष्ठ | beautiful; excellent |
| जोरी | जोड़ी; पुत्रों की जोड़ियाँ | pair; the paired sons |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सुरन्ह | देवताओं को | in the gods |
| भै | हुई | arose |
| प्रीति | प्रीति; स्नेह | affection |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ी | little |
2 पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।
English explanation
Then, beholding Rama, they rejoiced in their hearts; praising the king, they showered flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| रामहि | राम को | Rama |
| बिलोकि | देखकर | beholding |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| नृपहि | राजा दशरथ की | King Dasharatha |
| सराहि | प्रशंसा करके | having praised |
| सुमन | फूल | flowers |
| तिन्ह | उन्होंने; देवताओं ने | they, the gods |
| बरषे | बरसाए | showered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.315
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 296
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 296
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