बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने सब किसीको भरपूर दान दिया। जिसने पाया उसने भी नहीं रखा (लुटा दिया)। [नगरकी] सभी गलियोंके बीच-बीचमें कस्तूरी, चन्दन और केसरकी कीच मच गयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 195 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।
मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।
स्रोत अभिलेख 1.194 · पुस्तक पृ. 194, 195
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।
English explanation
All possessions were given away in charity to everyone. Whoever received something did not keep it either.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर्बस | सर्वस्व; सारी संपत्ति | all possessions |
| दान | दान में | in charity |
| दीन्ह | दे दिया | gave |
| सब | सब | every |
| काहू | किसी को | person; to anyone |
| जेहिं | जिसने | whoever |
| पावा | पाया | received |
| राखा | रखा | kept |
| नहिं | नहीं | not |
| ताहू | उसने भी | that person either |
2 मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।
English explanation
A fragrant muddy mixture of musk, sandalwood, and vermilion had spread throughout all the lanes, even into their middles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृगमद | कस्तूरी | musk |
| चंदन | चंदन | sandalwood |
| कुंकुम | कुंकुम; लाल मंगल-चूर्ण | vermilion ceremonial powder |
| कीचा | कीचड़; गीला लेप | muddy mixture; wet paste |
| मची | फैल गई; बन गई | formed and spread |
| सकल | सभी | all |
| बीथिन्ह | गलियों में | in the lanes |
| बिच | बीच | in the midst |
| बीचा | बीच; बीच-बीच में | through the middles |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.194
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 195
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 194, 195
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।