बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।
मूल पाठ
समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।
बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।
स्रोत अभिलेख 1.338 · पुस्तक पृ. 321, 322
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब बुद्धिमान् मन्त्री उन्हें समझाते हैं। तब राजाने विषाद करनेका समय न जानकर विचार किया। बारंबार पुत्रियोंको हृदयसे लगाकर सुन्दर सजी हुई पालकियाँ मँगवायी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 322 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।
English explanation
All the wise ministers began to counsel him. He then reflected that this was not the time to remain absorbed in grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझावत | समझाते हैं | counsel |
| सब | सभी | all |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सयाने | बुद्धिमान | wise |
| कीन्ह | किया | made |
| बिचारु | विचार | reflection |
| न | नहीं | not |
| अवसर | उचित समय | the appropriate time |
| जाने | जानकर | recognizing |
2 बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।
English explanation
He repeatedly embraced his daughter and had beautiful palanquins prepared and brought.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारहिं | बार ही | time after |
| बार | बार | time |
| सुता | पुत्री को | his daughter |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाई | लगाया | held close |
| सजि | सजाकर | having prepared and adorned |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| पालकीं | पालकियाँ | palanquins |
| मगाई | मँगवाईं | had brought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.338
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 322
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 322
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।