बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे परम वैराग्यवान् कहलाते थे; पर सीताजीको देखकर उनका भी धीरज भाग गया। राजाने जानकीजीको हृदयसे लगा लिया। [प्रेमके प्रभावसे] ज्ञानकी महान् मर्यादा मिट गयी (ज्ञानका बाँध टूट गया)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 322 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।
लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।
स्रोत अभिलेख 1.338 · पुस्तक पृ. 321, 322
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।
English explanation
On seeing Sita, his composure deserted him, although he was known as profoundly detached.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता को | Sita |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| धीरता | धैर्य | composure |
| भागी | जाता रहा | vanished |
| रहे | थे | had been |
| कहावत | कहलाते | known as |
| परम | अत्यंत | supremely |
| बिरागी | विरक्त | detached from worldly attachments |
2 लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।
English explanation
The king clasped Janaki to his heart; the lofty restraint sustained by his spiritual wisdom dissolved.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लीन्हि | ले लिया | took |
| राँय | राजा ने | the king |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| जानकी | जानकी अर्थात सीता को | Janaki, Sita |
| मिटी | मिट गई | dissolved |
| महामरजाद | महान संयम-मर्यादा | lofty bounds of restraint |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual wisdom |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.338
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 322
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 321, 322
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।