बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयुद्धमें श्रीहरिके हाथसे तुम्हारी मृत्यु होगी, जिससे तुम मुक्त हो जाओगे और फिर संसारमें जन्म नहीं लोगे। वे दोनों मुनिके चरणोंमें सिर नवाकर चले और समय पाकर राक्षस हुए॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 148 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।
चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.139 · पुस्तक पृ. 147, 148
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।
English explanation
You will die in battle at Hari’s hands. You will be liberated and will not return to worldly rebirth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समर | युद्ध में | in battle |
| मरन | मृत्यु | death |
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, Lord Vishnu |
| हाथ | हाथों | at the hands |
| तुम्हारा | तुम्हारी | your |
| होइहहु | हो जाओगे | will become |
| मुकुत | मुक्त | liberated |
| न | नहीं | not |
| पुनि | फिर | again |
| संसारा | संसार का जन्म-मरण | the cycle of worldly rebirth |
2 चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।
English explanation
The pair departed after bowing their heads at the sage’s feet, and in due time became demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले गए | departed |
| जुगल | दोनों | the pair |
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिर | सिर | heads |
| नाई | झुकाकर | bowing |
| भए | बने; हो गए | became |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| कालहि | नियत समय को | the appointed time |
| पाई | पाकर; आने पर | on reaching; when it arrived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.139
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 148
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 148
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।