बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसतीजीने सीताजीका वेष धारण किया, यह जानकर शिवजीके हृदयमें बड़ा विषाद हुआ। उन्होंने सोचा कि यदि मैं अब सतीसे प्रीति करता हूँ तो भक्तिमार्ग लुप्त हो जाता है और बड़ा अन्याय होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 77 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।
जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।
स्रोत अभिलेख 1.56 · पुस्तक पृ. 76, 77
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।
English explanation
Sati had assumed Sita’s guise; this caused deep sorrow in Shiva’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतीं | सती ने | Sati, as the subject |
| कीन्ह | धारण किया | assumed |
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| कर | का | of |
| बेषा | वेश | guise |
| सिव | शिव के | Shiva’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| भयउ | हुआ | arose |
| बिषाद | दुःख; विषाद | sorrow |
| बिसेषा | बहुत गहरा | especially deep |
2 जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।
English explanation
Shiva thought, “If I now show conjugal love toward Sati, the path of devotion will be lost, and it will be improper conduct.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अब | अब | now |
| करउँ | मैं करूँ | I should practice; I do |
| सती | सती | Sati, Shiva’s wife |
| सन | से; के साथ | toward; with |
| प्रीती | दांपत्य प्रेम | conjugal love |
| मिटइ | मिट जाएगा | will be lost |
| भगति | भक्ति का | of devotion |
| पथु | मार्ग | path |
| होइ | होगा | will be |
| अनीती | अनुचित आचरण | improper conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 77
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 76, 77
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।