बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।
मूल पाठ
सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।
कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.258 · पुस्तक पृ. 249, 250
भावार्थ
मूल पाठ के बादमन्त्री डर रहे हैं; इसलिये कोई उन्हें सीख भी नहीं देता, पण्डितोंकी सभामें यह बड़ा अनुचित हो रहा है। कहाँ तो वज्रसे भी बढ़कर कठोर धनुष और कहाँ ये कोमलशरीर किशोर श्यामसुन्दर!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 250 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।
English explanation
The ministers are afraid, and none offers counsel. This is gravely improper in an assembly of wise people.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सभय | भयभीत | afraid |
| सिख | सलाह | counsel |
| देइ | देता है | gives |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई भी | anyone |
| बुध | बुद्धिमानों की | of the wise |
| समाज | सभा | assembly |
| बड़ | बहुत; बड़ा | greatly |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| होई | हो रहा है | is happening |
2 कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।
English explanation
What a contrast between the bow, harder even than a thunderbolt, and the dark, tender-bodied youth Rama!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ; तुलना में एक ओर | where; on the one side |
| धनु | धनुष | bow |
| कुलिसहु | वज्र से भी | even than a thunderbolt |
| चाहि | से अधिक; की अपेक्षा | in comparison with |
| कठोरा | कठोर | hard |
| कहँ | कहाँ; दूसरी ओर | where; on the other side |
| स्यामल | साँवले | dark-complexioned |
| मृदुगात | कोमल शरीर वाले | tender-bodied |
| किसोरा | किशोर राम | the youthful Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.258
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 250
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 249, 250
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