बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअच्छी तरह नेत्र भरकर श्रीरामजीकी शोभा देखकर, फिर पिताके प्रणका स्मरण करके सीताजीका मन क्षुब्ध हो उठा। [वे मन-ही-मन कहने लगीं—] अहो! पिताजीने बड़ा ही कठिन हठ ठाना है, वे लाभ-हानि कुछ भी नहीं समझ रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 249 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।
अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।
स्रोत अभिलेख 1.258 · पुस्तक पृ. 249, 250
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।
English explanation
AI draft: Sita gazed fully at Rama’s beauty; then, remembering her father’s vow, her heart became troubled again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीकें | अच्छी तरह | carefully |
| निरखि | देखकर | having gazed at |
| नयन | आँखें | eyes |
| भरि | भरकर; जी भरकर | to the full |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| पितु | पिता की | father’s |
| पनु | प्रतिज्ञा | vow |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| बहुरि | फिर | again |
| मनु | मन | heart |
| छोभा | व्याकुल हुआ | became troubled |
2 अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।
English explanation
Alas! Father has fixed upon a harsh resolve; he considers neither gain nor loss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहह | हाय! | alas! |
| तात | पिता | father |
| दारुनि | कठोर | harsh |
| हठ | हठ; अटल आग्रह | obstinate resolve |
| ठानी | ठान लिया | has firmly adopted |
| समुझत | समझते; विचार करते | considers |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| लाभु | लाभ | gain |
| न | न; और न | nor |
| हानी | हानि | loss |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.258
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 249
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 249, 250
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।