बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दधर्मरुचि मन्त्रीका श्रीहरिके चरणोंमें प्रेम था। वह राजाके हितके लिये सदा उसको नीति सिखाया करता था। राजा गुरु, देवता, संत, पितर और ब्राह्मण—इन सबकी सदा सेवा करता रहता था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 161 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।
गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।
स्रोत अभिलेख 1.155 · पुस्तक पृ. 160, 161
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।
English explanation
The minister Dharmaruchi loved Hari’s feet and daily instructed the king in wise conduct for his welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्री | minister |
| धरमरुचि | धरमरुचि नामक मंत्री | Dharmaruchi, the minister |
| हरि | भगवान हरि | Lord Hari |
| पद | चरणों में | at the feet of |
| प्रीती | प्रेम; भक्ति | love; devotion |
| नृप | राजा का | the king’s |
| हित | कल्याण | welfare |
| हेतु | के लिए | for the sake of |
| सिखव | सिखाता था | instructed |
| नित | नित्य; प्रतिदिन | daily; regularly |
| नीती | नीति; उचित शासन और आचरण | wise governance and conduct |
2 गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।
English explanation
The king always served his teachers, the gods, saints, ancestors, and Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | teachers; spiritual preceptors |
| सुर | देवता | gods |
| संत | संत | saints |
| पितर | पितर; पूर्वज | departed ancestors |
| महिदेवा | ब्राह्मण; पृथ्वी के देव कहे जाने वाले | Brahmins, called gods on earth |
| करइ | करता है | performs |
| सदा | सदैव | always |
| नृप | राजा | the king |
| सब | सबकी | all of them |
| कै | की | of |
| सेवा | सेवा | service |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.155
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 161
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 160, 161
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।