बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा प्रतापभानुका बल पाकर भूमि सुन्दर कामधेनु (मनचाही वस्तु देनेवाली) हो गयी। [उनके राज्यमें ] प्रजा सब [प्रकारके] दु:खोंसे रहित और सुखी थी, और सभी स्त्री-पुरुष सुन्दर और धर्मात्मा थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 160 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।
सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 1.155 · पुस्तक पृ. 160, 161
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।
English explanation
AI draft: Supported by King Pratapabhanu’s power, the lovely land became like the wish-fulfilling cow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूप | राजा | king |
| प्रतापभानु | राजा प्रतापभानु | Pratapabhanu, the king |
| बल | बल; समर्थ संरक्षण | power; strong protection |
| पाई | पाकर | having received |
| कामधेनु | इच्छित वस्तुएँ देने वाली दिव्य गाय | the divine wish-fulfilling cow |
| भै | हो गई | became |
| भूमि | भूमि; देश | land; realm |
| सुहाई | सुंदर; सुहावनी | lovely; pleasing |
2 सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।
English explanation
The people were happy and free from every sorrow; the men and women were virtuous and beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| दुख | दुःख | sorrows |
| बरजित | से रहित | free from |
| प्रजा | प्रजा; राज्य के लोग | subjects; people of the realm |
| सुखारी | सुखी | happy |
| धरमसील | धर्म का आचरण करने वाले | virtuous; practicing righteousness |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.155
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 160
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 160, 161
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।