बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब सीताजीने सकुचाकर नेत्र खोले और रघुकुलके दोनों सिंहोंको अपने सामने [खड़े] देखा। नखसे शिखातक श्रीरामजीकी शोभा देखकर और फिर पिताका प्रण याद करके उनका मन बहुत क्षुब्ध हो गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 229 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।
नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।
स्रोत अभिलेख 1.234 · पुस्तक पृ. 228, 229
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।
English explanation
Then Sita shyly opened her eyes and beheld the two lions of Raghu’s lineage—Rama and Lakshmana—before her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुचि | संकोच करके | shyly |
| सीयँ | सीता ने | Sita |
| तब | तब | then |
| नयन | आँखें | eyes |
| उघारे | खोलीं | opened |
| सनमुख | सामने | before her |
| दोउ | दोनों | both |
| रघुसिंघ | रघुवंश के सिंह, राम और लक्ष्मण | lions of Raghu’s lineage, Rama and Lakshmana |
| निहारे | देखे | beheld |
2 नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।
English explanation
Seeing Rama’s beauty from toe to crown and recalling her father’s vow, Sita became deeply troubled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नख | पैरों के नखों से | from the toenails |
| सिख | सिर की चोटी तक | to the crown of the head |
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम | Rama |
| कै | की | of |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| सुमिरि | याद करके | recalling |
| पिता | पिता जनक की | her father Janaka’s |
| पनु | प्रतिज्ञा | vow |
| मनु | मन | her heart |
| अति | बहुत | deeply |
| छोभा | व्याकुल हुआ | became troubled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.234
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 229
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 228, 229
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।