बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।
मूल पाठ
सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।
होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।
स्रोत अभिलेख 1.68 · पुस्तक पृ. 86, 86
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारी सखियाँ, पार्वती, पर्वतराज हिमवान् और मैना सभीके शरीर पुलकित थे और सभीके नेत्रोंमें जल भरा था। देवॢषके वचन असत्य नहीं हो सकते, [यह विचारकर] पार्वतीने उन वचनोंको हृदयमें धारण कर लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 86 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।
English explanation
All the companions, Parvati, Himavan, and Maina had goosebumps, and their eyes were filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| सखीं | सखियाँ | female companions |
| गिरिजा | पर्वत-पुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain |
| गिरि | पर्वतराज हिमवान | Himavan, king of mountains |
| मैना | पार्वती की माता मैना | Maina, Parvati’s mother |
| पुलक | रोमांच | goosebumps |
| सरीर | शरीर | bodies |
| भरे | भरी हुई थीं | were filled |
| जल | आँसुओं से | with tears |
| नैना | आँखें | eyes |
2 होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।
English explanation
The divine sage’s words do not prove false—Uma held that statement firmly in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइ | होती है | proves to be |
| न | नहीं | not |
| मृषा | असत्य | false |
| देवरिषि | देवर्षि नारद की | of Narada, the divine sage |
| भाषा | वाणी | utterance |
| उमा | पार्वती ने | Uma, Parvati |
| सो | उस | that |
| बचनु | वचन को | statement |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| धरि | धारण करके | having placed |
| राखा | संजो रखा | kept firmly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 86
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 86, 86
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