बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।
मूल पाठ
उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।
जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।
स्रोत अभिलेख 1.68 · पुस्तक पृ. 86, 86
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें शिवजीके चरणकमलोंमें स्नेह उत्पन्न हो आया, परन्तु मनमें यह सन्देह हुआ कि उनका मिलना कठिन है। अवसर ठीक न जानकर उमाने अपने प्रेमको छिपा लिया और फिर वे सखीकी गोदमें जाकर बैठ गयीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 86 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।
English explanation
Love arose for Shiva’s lotus feet; yet, because union with him was difficult, doubt arose in her mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजेउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| सिव | भगवान शिव के | of Shiva |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| सनेहू | प्रेम | love |
| मिलन | शिव से मिलन | union with Shiva |
| कठिन | कठिन | difficult |
| मन | मन में | in her mind |
| भा | हुआ | arose |
| संदेहू | संशय | doubt |
2 जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।
English explanation
Recognizing that the moment was unsuitable, Uma concealed her love and then went and sat in her companion’s lap.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | recognizing |
| कुअवसरु | अनुपयुक्त समय | an unsuitable moment |
| प्रीति | अपना प्रेम | her love |
| दुराई | छिपा लिया | concealed |
| सखी | सखी की | her companion’s |
| उछँग | गोद में | in the lap |
| बैठी | बैठ गईं | sat down |
| पुनि | फिर | then |
| जाई | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 86
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 86, 86
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।