बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनारद मुनिकी वाणी सुनकर और उसको हृदयमें सत्य जानकर पति-पत्नी (हिमवान् और मैना) को दु:ख हुआ और पार्वतीजी प्रसन्न हुईं। नारदजीने भी इस रहस्यको नहीं जाना, क्योंकि सबकी बाहरी दशा एक-सी होनेपर भी भीतरी समझ भिन्न-भिन्न थी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 86 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।
नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।
स्रोत अभिलेख 1.68 · पुस्तक पृ. 86, 86
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।
English explanation
AI-draft meaning: Hearing the sage’s words, they accepted them as true in their hearts. The parents were distressed, but Uma rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि नारद की | of the sage Narada |
| गिरा | वाणी | words |
| सत्य | सत्य | true |
| जियँ | मन में | in the heart |
| जानी | माना | accepted as |
| दुख | दुःख हुआ | distress arose |
| दंपतिहि | माता-पिता को | to the parents |
| उमा | पार्वती | Uma, Parvati |
| हरषानी | प्रसन्न हुईं | rejoiced |
2 नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।
English explanation
Even Narada did not perceive this distinction: their outward condition was alike, but their understanding differed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारदहुँ | नारद भी | even Narada |
| यह | यह | this |
| भेदु | अंतर | distinction |
| न | नहीं | not |
| जाना | जान पाए | perceived |
| दसा | बाहरी अवस्था | outward condition |
| एक | एक जैसी | alike |
| समुझब | समझने का ढंग | understanding |
| बिलगाना | अलग था | differed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.68
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 86
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 86, 86
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।