बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दये सब शिवजीके धनुषरूपी बड़े जहाजको पाकर, समाज बनाकर उसपर जा चढ़े। ये श्रीरामचन्द्रजीकी भुजाओंके बलरूपी अपार समुद्रके पार जाना चाहते हैं, परन्तु कोई केवट नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 252 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।
राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।
स्रोत अभिलेख 1.26 · पुस्तक पृ. 251, 252
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।
English explanation
All these, finding Shiva’s bow as a great ship, went aboard together.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभुचाप | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| बड | बड़ा | great; large |
| बोहितु | जहाज | ship |
| पाई | पाकर | having found |
| चढे | चढ़ गए | boarded |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सब | सब पूर्वोक्त भाव | all the previously listed feelings |
| संगु | साथ; समूह | company; a group |
| बनाई | बनाकर | forming; joining together |
2 राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।
English explanation
Rama’s arm-strength is a boundless ocean; all these seek to cross it, but there is no one to ferry them across.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama’s |
| बाहुबल | भुजाओं का बल | strength of the arms |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| अपारू | असीम; जिसका पार न मिले | boundless; impossible to fathom |
| चहत | चाहते हैं | seek; wish |
| पारु | पार जाना | to reach the other shore |
| नहि | नहीं है | there is no |
| कोउ | कोई | anyone |
| कड़हारू | पार उतारने वाला | one who ferries across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 252
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 251, 252
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।