बालकाण्ड · दोहा 260 · दोहा/सोरठा
राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।
राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।
चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.26 · पुस्तक पृ. 251, 252
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।
राम ने सभी लोगों को देखा और उन्हें चित्र में अंकित आकृतियों जैसा निश्चल पाया।
English explanation
Rama looked at everyone and saw them motionless, like figures in a painting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| बिलोके | देखा; दृष्टि डाली | looked at |
| लोग | लोगों को | the people |
| सब | सभी | all |
| चित्र | चित्र में | in a painting |
| लिखे | अंकित; चित्रित | drawn; depicted |
| से | जैसे | like; as though |
| देखि | देखकर | having seen |
2 चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।
करुणा के धाम राम ने सीता को विशेष व्याकुल जानकर उनकी ओर देखा।
English explanation
Rama, the abode of compassion, looked toward Sita, knowing her to be especially distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितई | दृष्टि डाली; देखा | looked toward |
| सीय | सीता की ओर | toward Sita |
| कृपायतन | कृपा के धाम राम | Rama, the abode of compassion |
| जानी | जानकर | knowing; recognizing |
| बिकल | व्याकुल | distressed; agitated |
| बिसेषि | विशेष रूप से; बहुत | especially; greatly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 260
- स्रोत अभिलेख
- 1.26
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 251, 252
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