बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।
मूल पाठ
श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।
सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।
स्रोत अभिलेख 1.263 · पुस्तक पृ. 254, 254
भावार्थ
मूल पाठ के बादधनुष टूट जानेपर राजालोग ऐसे श्रीहीन (निस्तेज) हो गये, जैसे दिनमें दीपककी शोभा जाती रहती है। सीताजीका सुख किस प्रकार वर्णन किया जाय; जैसे चातकी स्वातीका जल पा गयी हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 254 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।
English explanation
When the bow broke, the other kings lost their splendor, as a lamp loses its brilliance in daylight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीहत | शोभा और तेज से रहित | bereft of splendor |
| भए | हो गए | became |
| भूप | राजा | kings |
| धनु | धनुष | the bow |
| टूटे | टूटने पर | upon breaking |
| जैसें | जैसे | just as |
| दिवस | दिन में | in daylight |
| दीप | दीपक की | a lamp’s |
| छबि | चमक, शोभा | brilliance |
| छूटे | खो जाती है | is lost |
2 सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।
English explanation
How can Sita’s happiness be described? It was as though a female chataka bird had received the rain of Swati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita |
| सुखहि | सुख का | happiness |
| बरनिअ | वर्णन किया जाए | might be described |
| केहि | किस | what |
| भाँती | प्रकार से | in a manner |
| जनु | मानो | as though |
| चातकी | चातक पक्षी की मादा | a female chataka bird |
| पाइ | पाकर | having received |
| जलु | जल | water |
| स्वाती | स्वाती नक्षत्र का | of the Swati asterism |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.263
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 254
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 254, 254
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।