बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसखियोंसहित रानी अत्यन्त हॢषत हुई। मानो सूखते हुए धानपर पानी पड़ गया हो। जनकजीने सोच त्यागकर सुख प्राप्त किया। मानो तैरते-तैरते थके हुए पुरुषने थाह पा ली हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 254 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।
जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.263 · पुस्तक पृ. 254, 254
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।
English explanation
The queen rejoiced greatly with her companions, as though water had fallen on withering rice plants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखिन्ह | सखियों के | female companions |
| सहित | साथ | with |
| हरषी | हर्षित हुईं | rejoiced |
| अति | बहुत | greatly |
| रानी | रानी; सीता की माता | the queen, Sita’s mother |
| सूखत | सूखते हुए | withering |
| धान | धान की फसल | rice plants |
| परा | पड़ा | fell |
| जनु | मानो | as though |
| पानी | पानी | water |
2 जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।
English explanation
Janaka cast off his anxiety and found happiness, like an exhausted swimmer finding water shallow enough to stand in.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक; सीता के पिता | King Janaka, Sita’s father |
| लहेउ | पाया | obtained |
| सुखु | सुख | happiness |
| सोचु | चिंता | anxiety |
| बिहाई | छोड़कर | having cast off |
| पैरत | तैरते हुए | while swimming |
| थकें | थके हुए व्यक्ति ने | an exhausted person |
| थाह | पाँव टिकाने योग्य तल | a bottom on which to stand |
| जनु | मानो | as though |
| पाई | पा ली | found |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.263
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 254
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 254, 254
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