बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।
मूल पाठ
लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।
देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।
स्रोत अभिलेख 1.232 · पुस्तक पृ. 227, 227
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब सखियोंने लताकी ओटमें सुन्दर श्याम और गौर कुमारोंको दिखलाया। उनके रूपको देखकर नेत्र ललचा उठे; वे ऐसे प्रसन्न हुए मानो उन्होंने अपना खजाना पहचान लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 227 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।
English explanation
Then her companions pointed out the lovely dark and fair youths behind the creepers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लता | लताओं की | of the creepers |
| ओट | आड़ में | behind the screen |
| तब | तब | then |
| सखिन्ह | सखियों ने | her companions |
| लखाए | दिखाए | pointed out |
| स्यामल | साँवले राम | dark-complexioned Rama |
| गौर | गोरे लक्ष्मण | fair-complexioned Lakshmana |
| किसोर | युवा राजकुमार | young princes |
| सुहाए | सुंदर | lovely |
2 देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।
English explanation
Seeing their beauty, Sita’s eyes longed for more and rejoiced as though they had recognized their own treasure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| रूप | सुंदर रूप | beautiful appearance |
| लोचन | नेत्र | her eyes |
| ललचाने | और देखने को लालायित हुए | grew eager to gaze further |
| हरषे | आनंदित हुए | rejoiced |
| जनु | मानो | as though |
| निज | अपना ही | their own |
| निधि | खजाना | treasure |
| पहिचाने | पहचान लिया हो | had recognized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.232
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 227
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 227, 227
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