बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।
मूल पाठ
चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।
जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।
स्रोत अभिलेख 1.232 · पुस्तक पृ. 227, 227
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी चकित होकर चारों ओर देख रही हैं। मन इस बातकी चिन्ता कर रहा है कि राजकुमार कहाँ चले गये। बालमृग-नयनी (मृगके छौनेकी-सी आँखवाली) सीताजी जहाँ दृष्टि डालती हैं, वहाँ मानो श्वेत कमलोंकी कतार बरस जाती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 227 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।
English explanation
AI draft: Sita looks around in all four directions, bewildered, wondering anxiously where the princes have gone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितवहि | देखती हैं | looks |
| चकित | चकित होकर | bewildered |
| चहूँ | चारों | all four |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| सीता | सीता, जनक की पुत्री | Sita, Janaka’s daughter |
| कहँ | कहाँ | where |
| गए | चले गए | have gone |
| नृपकिसोर | युवा राजकुमार, राम और लक्ष्मण | the young princes, Rama and Lakshmana |
| मनु | मन में | in her mind |
| चिंता | चिंता है | there is anxious concern |
2 जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।
English explanation
Wherever fawn-eyed Sita looks, it is as though a row of white lotuses showers down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| बिलोक | देखती हैं | looks |
| मृग | हिरण के | of a deer |
| सावक | बच्चे के समान | like a fawn |
| नैनी | नेत्रों वाली सीता | Sita, whose eyes resemble those of a fawn |
| जनु | मानो | as though |
| तहँ | वहाँ | there |
| बरिस | बरसती है | showers down |
| कमल | कमलों की | of lotuses |
| सित | श्वेत | white |
| श्रेनी | पंक्ति | a row |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.232
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 227
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 227, 227
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।