बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।
मूल पाठ
राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।
अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.119 · पुस्तक पृ. 131, 131
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पार्वती! वही परमात्मा श्रीरामचन्द्रजी हैं। उनमें भ्रम [देखनेमें आता] है, तुम्हारा ऐसा कहना अत्यन्त ही अनुचित है। इस प्रकारका सन्देह मनमें लाते ही मनुष्यके ज्ञान, वैराग्य आदि सारे सद्गुण नष्ट हो जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 131 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।
English explanation
O Bhavani, Rama is that Supreme Self. Your words expressing doubt about him are most improper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| सो | वही | that very |
| परमातमा | परम आत्मा | Supreme Self |
| भवानी | हे पार्वती | O Parvati |
| तहँ | उनके विषय में | concerning him |
| भ्रम | भ्रम या संदेह | misapprehension or doubt |
| अति | अत्यंत | most |
| अबिहित | अनुचित | improper |
| तव | तुम्हारी | your |
| बानी | वाणी | words |
2 अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।
English explanation
When such doubt is brought into the heart, knowledge, detachment, and all virtues depart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| संसय | संदेह | doubt |
| आनत | लाने पर | upon bringing |
| उर | हृदय | the heart |
| माहीं | में | into |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिराग | वैराग्य | detachment |
| सकल | सभी | all |
| गुन | गुण | virtues |
| जाहीं | चले जाते हैं | depart |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 131
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 131
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।