बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।
मूल पाठ
सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।
भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।
स्रोत अभिलेख 1.119 · पुस्तक पृ. 131, 131
भावार्थ
मूल पाठ के बादशिवजीके भ्रमनाशक वचनोंको सुनकर पार्वतीजीके सब कुतर्कोंकी रचना मिट गयी। श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें उनका पे्रम और विश्वास हो गया और कठिन असम्भावना (जिसका होना सम्भव नहीं, ऐसी मिथ्या कल्पना) जाती रही॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 131 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।
English explanation
On hearing Shiva's words that dispelled delusion, the entire web of false reasoning vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिव | शिव | Shiva |
| के | के | of |
| भ्रम | भ्रम को | delusion |
| भंजन | दूर करने वाले | dispelling |
| बचना | वचन | words |
| मिटि | मिट | vanished |
| गै | गई | completely |
| सब | सारी | entire |
| कुतरक | कुतर्कों | false reasoning |
| कै | की | of |
| रचना | रचना या जाल | constructed web |
2 भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।
English explanation
Love and trust arose toward Rama's feet; the severe doubt that deemed his supreme nature impossible passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भइ | उत्पन्न हुई | arose |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu's line |
| पद | चरणों में | toward the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रतीती | विश्वास | trust |
| दारुन | कठोर और पीड़ादायक | severe and distressing |
| असंभावना | असंभव मानने वाला संदेह | doubt that deems something impossible |
| बीती | दूर हो गई | passed away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 131
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 131
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