बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।
मूल पाठ
रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।
मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 57, 58
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसका नाम रामचरितमानस है, जिसके कानोंसे सुनते ही शान्ति मिलती है। मनरूपी हाथी विषय- रूपी दावानलमें जल रहा है, वह यदि इस रामचरितमानसरूपी सरोवरमें आ पड़े तो सुखी हो जाय॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 57 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।
English explanation
Its name is Ramcharitmanas; listening to it brings repose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचरितमानस | राम के चरित का मानस-सरोवर; ग्रंथ का नाम | the lake of Rama’s deeds; the work’s title |
| एहि | इसका | its |
| नामा | नाम | name |
| सुनत | सुनने पर | upon hearing |
| श्रवन | कानों से | with the ears |
| पाइअ | प्राप्त होता है | one obtains |
| बिश्रामा | विश्राम; शांति | repose or peace |
2 मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।
English explanation
The elephant-like mind burns in the forest fire of sense-objects; if it enters this lake, it becomes happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | the mind |
| करि | हाथी | elephant |
| विषय | इंद्रियों के भोग-विषय | objects of sensory enjoyment |
| अनल | अग्नि | fire |
| बन | वन | forest |
| जरई | जलता है | burns |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| सुखी | सुखी | happy |
| जौ | यदि | if |
| एहिं | इसमें; इस | in this |
| सर | सरोवर | lake |
| परई | उतर पड़े; प्रवेश करे | enters |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 57
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 57, 58
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।