बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।
मूल पाठ
सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।
बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 57, 58
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस अयोध्यापुरीको सब प्रकारसे मनोहर, सब सिद्धियोंकी देनेवाली और कल्याणकी खान समझकर मैंने इस निर्मल कथाका आरम्भ किया, जिसके सुननेसे काम, मद और दम्भ नष्ट हो जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 57 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।
English explanation
Knowing this city to be delightful in every way, a giver of all spiritual attainments and a storehouse of auspiciousness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| पुरी | अयोध्या नगरी को | the city of Ayodhya |
| मनोहर | मन को आकर्षित करने वाली | delightful |
| जानी | जानकर | knowing |
| सकल | समस्त | all |
| सिद्धिप्रद | सिद्धियाँ देने वाली | bestowing spiritual attainments |
| मंगल | शुभता; कल्याण | auspiciousness |
| खानी | खान; भंडार | a mine or storehouse |
2 बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।
English explanation
I began the pure narrative, hearing which destroys lust, arrogance, and pretence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिमल | निर्मल; पवित्र | pure |
| कथा | कथा | narrative |
| कर | का | of |
| कीन्ह | किया | made |
| अरंभा | आरंभ | a beginning |
| सुनत | सुनने से | upon hearing |
| नसाहिं | नष्ट हो जाते हैं | are destroyed |
| काम | कामवासना | lust |
| मद | अहंकार; घमंड | arrogance |
| दंभा | दंभ; कपटपूर्ण दिखावा | pretence or hypocrisy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 57
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 57, 58
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।