बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।
मूल पाठ
राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।
चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।
स्रोत अभिलेख 1.35 · पुस्तक पृ. 57, 58
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह शोभायमान अयोध्यापुरी श्रीरामचन्द्रजीके परमधामकी देनेवाली है, सब लोकोंमें प्रसिद्ध है और अत्यन्त पवित्र है। जगत्में [अण्डज, स्वेदज, उद्भिज्ज और जरायुज] चार खानि (प्रकार) के अनन्त जीव हैं, इनमेंसे जो कोई भी अयोध्याजीमें शरीर छोड़ते हैं वे फिर संसारमें नहीं आते (जन्म-मृत्युके चक्करसे छूटकर भगवान्के परमधाममें निवास करते हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 57 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।
English explanation
This lovely city of Ayodhya grants access to Rama’s abode and is known throughout all worlds as exceedingly holy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| धामदा | धाम देने वाली | granting the divine abode |
| पुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| सुहावनि | सुंदर; मनभावनी | lovely |
| लोक | लोकों में | in the worlds |
| समस्त | सभी | all |
| बिदित | प्रसिद्ध; जानी हुई | known |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| पावनि | पवित्र; पावन करने वाली | holy and purifying |
2 चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।
English explanation
The countless beings of the world’s four birth categories, if they leave their bodies in Ayodhya, do not return to the cycle of worldly rebirth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारि | चार | four |
| खानि | जन्म की श्रेणियाँ | categories of birth |
| जग | जगत के | of the world |
| जीव | जीव | living beings |
| अपारा | असंख्य | countless |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| तजे | त्यागने पर | upon leaving |
| तनु | शरीर | the body |
| नहि | नहीं | not |
| संसारा | जन्म-मरण का संसार | the cycle of worldly rebirth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 57
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 57, 58
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।