बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमहाराज अयोध्यापुरीको चलना चाहते हैं, उन्होंने हमें विदा होनेके लिये यहाँ भेजा है। हे माता! प्रसन्न मनसे आज्ञा दीजिये और हमें अपने बालक जानकर सदा स्नेह बनाये रखियेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 320 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।
मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।
स्रोत अभिलेख 1.336 · पुस्तक पृ. 320, 320
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।
English explanation
King Dasharatha wishes to leave for Ayodhya; he has sent us here to take our leave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| अवधपुर | अयोध्या नगर को | to the city of Ayodhya |
| चहत | चाहते हैं | wishes |
| सिधाए | प्रस्थान करना | to depart |
| बिदा | विदा | leave |
| होन | होने के लिए | to take |
| हम | हमें | us |
| इहाँ | यहाँ | here |
| पठाए | भेजा है | has sent |
2 मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।
English explanation
Mother, gladly give us permission to depart; regard us as your children and always continue to love us.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | हे माता | O mother |
| मुदित | प्रसन्न | glad |
| मन | मन से | at heart |
| आयसु | अनुमति | permission |
| देहू | दीजिए | please give |
| बालक | अपने बच्चे | your children |
| जानि | मानकर | regarding us as |
| करब | करते रहिए | please continue to show |
| नित | सदा | always |
| नेहू | स्नेह | affection |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.336
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 320
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 320, 320
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।