बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।
मूल पाठ
सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।
हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 1.336 · पुस्तक पृ. 320, 320
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन वचनोंको सुनते ही रनिवास उदास हो गया। सासुएँ प्रेमवश बोल नहीं सकतीं। उन्होंने सब कुमारियोंको हृदयसे लगा लिया और उनके पतियोंको सौंपकर बहुत विनती की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 320 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।
English explanation
On hearing these words, the women of the queens’ quarters broke into tears; overwhelmed with affection, the mother-in-law could not speak.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन | the words |
| बिलखेउ | बिलख उठा | broke into weeping |
| रनिवासू | रानीवास की स्त्रियाँ | the women of the queens’ quarters |
| बोलि | बोल | speak |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकतीं | could |
| प्रेमबस | प्रेम से विवश | overwhelmed with affection |
| सासू | सास | mother-in-law |
2 हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।
English explanation
They embraced all the princesses, then entrusted them to their husbands and made earnest requests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय से | to the heart |
| लगाइ | लगाकर | having held close |
| कुअँरि | राजकुमारियों को | the princesses |
| सब | सभी | all |
| लीन्ही | ले लिया | took into their embrace |
| पतिन्ह | पतियों को | to their husbands |
| सौंपि | सौंपकर | having entrusted |
| बिनती | विनती | requests |
| अति | बहुत | earnestly |
| कीन्ही | की | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.336
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 320
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 320, 320
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।