बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछलसे जो राक्षस वहाँ राजाओंके वेषमें [बैठे] थे, उन्होंने प्रभुको प्रत्यक्ष कालके समान देखा। नगरनिवासियोंने दोनों भाइयोंको मनुष्योंके भूषणरूप और नेत्रोंको सुख देनेवाला देखा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 235 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।
पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 1.241 · पुस्तक पृ. 235, 235
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।
English explanation
The demons present in the deceptive guise of kings saw the Lord as death itself made manifest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहे | वहाँ थे | were present |
| असुर | असुर | demons |
| छल | छल से | deceptively |
| छोनिप | राजाओं के | of kings |
| बेषा | वेश में | in the guise |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| प्रगट | प्रत्यक्ष; साक्षात् | manifest; embodied |
| कालसम | काल अर्थात् मृत्यु के समान | like death |
| देखा | देखा | saw |
2 पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।
English explanation
The townspeople saw the two brothers as ornaments of humankind and a delight to the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरबासिन्ह | नगरवासियों ने | the townspeople |
| देखे | देखा | saw |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों राम और लक्ष्मण को | brothers Rama and Lakshmana |
| नरभूषन | मनुष्यजाति के भूषण | ornaments of humankind |
| लोचन | आँखों को | to the eyes |
| सुखदाई | सुख देने वाले | giving delight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.241
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 235
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 235, 235
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।