बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसारे ब्रह्माण्डमें जय-जयकारकी ध्वनि छा गयी, जिसमें धनुष टूटनेकी ध्वनि जान ही नहीं पड़ती। जहाँ-तहाँ स्त्री-पुरुष प्रसन्न होकर कह रहे हैं कि श्रीरामचन्द्रजीने शिवजीके भारी धनुषको तोड़ डाला॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 254 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।
मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।
स्रोत अभिलेख 1.262 · पुस्तक पृ. 253, 254
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।
English explanation
The whole world filled with cries of victory; amid them, the sound of the bow breaking could not be distinguished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रही | व्याप्त हो रही थी | was resounding |
| भुवन | संसार में | throughout the world |
| भरि | भरकर; सर्वत्र | throughout; filling it |
| जय | जय हो | victory! |
| जय | जय हो | victory! |
| बानी | वाणी; जयघोष | voices; cries of acclaim |
| धनुषभंग | धनुष टूटने की | of the bow breaking |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| जात | जा सकती थी | could be |
| न | नहीं | not |
| जानी | पहचानी | distinguished |
2 मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।
English explanation
Everywhere, men and women joyfully say, ‘Rama has broken Shiva's mighty bow!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| भंजेउ | तोड़ दिया | broke |
| राम | राम ने | Rama |
| संभुधनु | शंभु अर्थात शिव का धनुष | the bow of Shiva |
| भारी | विशाल और प्रबल | mighty and massive |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.262
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 254
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 253, 254
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।