बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।
मूल पाठ
मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।
सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।
स्रोत अभिलेख 1.133 · पुस्तक पृ. 143, 143
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपानिधान भगवान्ने मुनिके कल्याणके लिये उन्हें ऐसा कुरूप बना दिया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता; पर यह चरित कोई भी न जान सका। सबने उन्हें नारद ही जानकर प्रणाम किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 143 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।
English explanation
For the sage’s good, the Lord, the treasury of compassion, gave him an ugly appearance beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| हित | कल्याण | welfare |
| कारन | के लिए | for the sake of |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार प्रभु ने | the Lord, treasury of compassion |
| दीन्ह | दिया | gave |
| कुरूप | कुरूप रूप | an ugly appearance |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन किया | described |
2 सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।
English explanation
No one discerned that divine action; recognizing him as Narada, everyone bowed their head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस | that |
| चरित्र | लीला या किए हुए कार्य को | act or divine play |
| लखि | पहचान | discern |
| काहुँ | कोई भी | anyone |
| न | नहीं | not |
| पावा | सका | was able to |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| जानि | जानकर | recognizing him as |
| सबहिं | सबने | everyone |
| सिर | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.133
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 143
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 143
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