बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।
मूल पाठ
निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।
मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.133 · पुस्तक पृ. 143, 143
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजालोग खूब सज-धजकर समाजसहित अपने-अपने आसनपर बैठे थे। मुनि (नारद) मन-ही- मन प्रसन्न हो रहे थे कि मेरा रूप बड़ा सुन्दर है, मुझे छोड़ कन्या भूलकर भी दूसरेको न वरेगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 143 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।
English explanation
The kings, elaborately adorned, sat on their respective seats with their retinues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| आसन | आसनों पर | on seats |
| बैठे | बैठे थे | were seated |
| राजा | राजा लोग | the kings |
| बहु | बहुत | much |
| बनाव | सजावट और श्रृंगार | adornment and finery |
| करि | करके | having made |
| सहित | साथ | together with |
| समाजा | साथियों के समूह | their retinues |
2 मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।
English explanation
The sage rejoiced inwardly: ‘My beauty is exceptional; she will not choose another instead of me, even by mistake.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि नारद के | of the sage Narada |
| मन | मन में | in the mind |
| हरष | आनंद था | there was joy |
| रूप | सुंदरता | beauty |
| अति | अत्यधिक | exceptional |
| मोरें | मुझमें; मेरी | in me; my |
| मोहि | मुझे | me |
| तजि | छोड़कर | passing over |
| आनहि | किसी दूसरे को | another |
| बारिहि | वह वरेगी | she will choose as husband |
| न | नहीं | not |
| भोरें | भूल से भी | even by mistake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.133
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 143
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 143
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