बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।
मूल पाठ
मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।
सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।
स्रोत अभिलेख 1.127 · पुस्तक पृ. 138, 138
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवराज इन्द्रकी सभामें जाकर उसने मुनिकी सुशीलता और अपनी करतूत सब कही, जिसे सुनकर सबके मनमें आश्चर्य हुआ और उन्होंने मुनिकी बड़ाई करके श्रीहरिको सिर नवाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 138 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।
English explanation
Going to Indra’s assembly, the god of desire described the sage’s gracious conduct and everything he himself had done.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | नारद मुनि की | of the sage Narada |
| सुसीलता | सुशीलता, सौम्य व्यवहार | gracious conduct |
| आपनि | अपनी | his own |
| करनी | की हुई बातें, कार्य | deeds |
| सुरपति | देवराज इंद्र की | of Indra, king of the gods |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सब | सब कुछ | everything |
| बरनी | वर्णन किया | described |
2सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।
English explanation
Hearing this, everyone was amazed. They praised the sage and bowed their heads to Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सभी | everyone |
| कें | के | of |
| मन | मन में | in their minds |
| अचरजु | आश्चर्य | amazement |
| आवा | आया, उत्पन्न हुआ | arose |
| मुनिहि | मुनि नारद की | the sage Narada |
| प्रसंसि | प्रशंसा करके | having praised |
| हरिहि | हरि, विष्णु को | to Hari, Vishnu |
| सिरु | सिर | their heads |
| नावा | झुकाया | bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 138
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 138, 138
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।