बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब नारदजी शिवजीके पास गये। उनके मनमें इस बातका अहंकार हो गया कि हमने कामदेवको जीत लिया। उन्होंने कामदेवके चरित्र शिवजीको सुनाये और महादेवजीने उन (नारदजी) को अत्यन्त प्रिय जानकर [इस प्रकार] शिक्षा दी—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 138 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।
मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।
स्रोत अभिलेख 1.127 · पुस्तक पृ. 138, 138
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।
English explanation
Then Narada went to Shiva, with the prideful thought in his mind, ‘I have conquered the god of desire.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नारद | नारद मुनि | the sage Narada |
| गवने | गए | went |
| सिव | भगवान शिव के | of Lord Shiva |
| पाहीं | पास | to the presence |
| जिता | जीत लिया | conquered |
| काम | कामदेव को | the god of desire |
| अहमिति | ‘मैं’ का भाव, अभिमान | the proud sense of ‘I’ |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | within |
2 मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।
English explanation
Narada recounted the god of desire’s actions to Shiva. Holding Narada very dear, Shiva counseled him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मार | कामदेव के | of the god of desire |
| चरित | कार्य, वृत्तांत | actions and their account |
| संकरहिं | शिव को | to Shiva |
| सुनाए | सुनाए | recounted |
| अतिप्रिय | अत्यंत प्रिय | very dear |
| जानि | जानकर, मानकर | considering |
| महेस | महेश, शिव ने | Shiva |
| सिखाए | समझाया, सलाह दी | counseled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 138
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 138, 138
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