बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।
मूल पाठ
बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।
तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।
स्रोत अभिलेख 1.127 · पुस्तक पृ. 138, 138
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनि! मैं तुमसे बार-बार विनती करता हूँ कि जिस तरह यह कथा तुमने मुझे सुनायी है, उस तरह भगवान् श्रीहरिको कभी मत सुनाना। चर्चा भी चले तब भी इसको छिपा जाना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 138 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।
English explanation
Shiva said, ‘Sage, I repeatedly entreat you: just as you have told this story to me—’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| बिनवउँ | मैं विनती करता हूँ | I entreat |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| तोहीं | तुमसे | you |
| जिमि | जिस प्रकार | just as |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा, वृत्तांत | story |
| सुनायहु | तुमने सुनाई | you have told |
| मोहीं | मुझे | to me |
2 तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।
English explanation
‘Never tell it to Hari in that manner. Even if the subject comes up, keep it concealed.’ The final instruction is somewhat uncertain because of the supplied reading ‘दुराएडु’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिमि | उसी प्रकार | in that manner |
| जनि | मत | do not |
| हरिहि | हरि, विष्णु को | to Hari, Vishnu |
| सुनावहु | सुनाना | tell |
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| चलेहुँ | चलने पर भी | even if it arises |
| प्रसंग | प्रसंग, चर्चा | the subject |
| दुराएडु | छिपाए रखना | keep concealed |
| तबहूँ | तब भी | even then |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.127
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 138
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 138, 138
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।