बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।
मूल पाठ
मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।
कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.172 · पुस्तक पृ. 174, 175
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनमें मुनिकी महिमाका अनुमान करके वह धीरेसे उठा, जिसमें रानी न जान पावे। फिर उसी घोड़ेपर चढ़कर वनको चला गया। नगरके किसी भी स्त्री-पुरुषने नहीं जाना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 174 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।
English explanation
Attributing this in his mind to the sage’s power, the king rose quietly, so that even the queen did not know.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि की | of the sage |
| महिमा | महिमा; सामर्थ्य | greatness; power |
| मन | मन | mind |
| महुँ | में | in |
| अनुमानी | अनुमान करके | inferring |
| उठेउ | उठा | rose |
| गवँहि | चुपके से; धीरे से | quietly; stealthily |
| जेहि | जिस तरह से | in such a way that |
| जान | जान सकी | knew; noticed |
| न | नहीं | not |
| रानी | रानी | the queen |
2 कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।
English explanation
He rode that same horse to the forest; no man or woman in the city knew of it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कानन | वन में | to the forest |
| गयउ | गया | went |
| बाजि | घोड़े पर | on the horse |
| चढ़ि | सवार होकर | mounting; riding |
| तेहीं | उसी | that same |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| न | नहीं | not |
| जानेउ | जाना; पता पाया | knew; learned |
| केहीं | किसी ने भी | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.172
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 174
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 174, 175
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